परमेश्वर

परमेश्वर कौन है? निर्गमन 3:14 में स्वयं उसने अपना नाम प्रकट किया — “मैं जो हूं सो हूं।” दिन 270 का मनन उसी प्रकटीकरण के चार आयामों पर।

वचन

“तब परमेश्वर ने मूसा से कहा, मैं जो हूं सो हूं; फिर उस ने कहा, तू इस्राएलियों से यों कहना, कि जिसका नाम मैं हूं है, उसी ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है।” निर्गमन 3:14 (हिंदी पवित्र बाइबल, BSI O.V.)

संदर्भ

मूसा मिस्र से भागकर मिद्यान में चालीस वर्षों से भेड़ें चरा रहा था। एक दिन वह जलती हुई झाड़ी के पास पहुँचता है — झाड़ी जल रही है, परन्तु जलकर भस्म नहीं हो रही। वहीं से परमेश्वर पुकारते हैं। मूसा को इस्राएलियों को मिस्र से निकालने का बुलावा मिलता है। डरते हुए वह पूछता है — “लोग पूछेंगे, उसका नाम क्या है? मैं उन्हें क्या उत्तर दूँ?”

परमेश्वर का उत्तर मानवीय भाषा की सीमाओं को तोड़ता है। वह नाम जो वह बताता है — “मैं जो हूं सो हूं” (इब्रानी में: एह्ये अशेर एह्ये) — एक संज्ञा नहीं, एक घोषणा है। इसी से यहोवा (YHWH) नाम निकलता है, जो पूरे पुराने नियम में परमेश्वर का व्यक्तिगत नाम है।

अर्थ

“मैं जो हूं सो हूं” के कम-से-कम चार आयाम हैं। पहला: स्वतंत्र अस्तित्व। परमेश्वर किसी पर निर्भर नहीं। हर वस्तु का अस्तित्व किसी कारण से है — माता-पिता, सूर्य, भोजन, पृथ्वी। परमेश्वर का अस्तित्व उसके अपने अस्तित्व से है। वह स्वयंभू है। यह न केवल दार्शनिक सत्य है — यह व्यावहारिक भी है। जो स्वयं अस्तित्व रखता है, वह कभी समाप्त नहीं होगा।

दूसरा: निरन्तरता। “मैं हूं” कोई काल नहीं — न भूतकाल, न वर्तमान, न भविष्य। परमेश्वर सब कालों के ऊपर है। जो वह कल था, वही आज है, और वही कल भी रहेगा (इब्रानियों 13:8)। संसार बदलता है; परमेश्वर अपरिवर्तनीय है। आपके जीवन में जो भी बदला हो, परमेश्वर वही है जो वह सदा से रहा है।

तीसरा: उपस्थिति। हिब्रू भाषा में “एह्ये” का अर्थ “मैं हूँ” भी है और “मैं रहूँगा” भी। परमेश्वर मूसा से वास्तव में कह रहा है, “मैं तेरे साथ हूँ, और तेरे साथ रहूँगा।” यह डरते हुए मूसा को एक नाम से अधिक — एक साथी से मिलवाता है। परमेश्वर का स्वभाव दूरी का नहीं, साथ का है।

चौथा: नया नियम का पूरा होना। यूहन्ना के सुसमाचार में यीशु कई बार कहता है, “मैं हूँ” — मैं जीवन की रोटी हूँ, मैं जगत की ज्योति हूँ, मैं अच्छा चरवाहा हूँ, मैं पुनरुत्थान और जीवन हूँ। यूहन्ना 8:58 में वह स्पष्ट करता है: “इब्राहीम के जन्म से पहले मैं हूँ।” यहूदी इसे सुनकर पत्थर उठाते हैं — क्योंकि उन्हें समझ आ गया कि यीशु निर्गमन 3 का “मैं हूं” अपने ऊपर ले रहा है। बाइबल का परमेश्वर अदृश्य नहीं रहता; वह यीशु मसीह में दिखाई देता है।

कैसे लागू करें

  1. परमेश्वर को नाम से पुकारें। प्रार्थना में “हे परमेश्वर” कहना अच्छा है — और इसे एक रिश्ते की बात बनाइए, औपचारिकता की नहीं। आप उस सर्वोच्च को पुकार रहे हैं जिसने स्वयं को आपके पास उतारा।
  2. भय में “मैं तेरे साथ हूँ” को याद करिए। जब परिस्थिति अनिश्चित हो, तो याद रखिए — परमेश्वर का नाम ही प्रतिज्ञा है। वह स्वयं उपस्थिति है।
  3. परिवर्तनों में स्थिर परमेश्वर को थामिए। लोग बदलते हैं, स्वास्थ्य बदलता है, परिस्थितियाँ बदलती हैं। एक चीज़ नहीं बदलती — परमेश्वर का स्वभाव। उसी पर निर्भरता रखिए।
  4. यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर को देखिए। जब परमेश्वर का स्वभाव अस्पष्ट लगे, तो यीशु के जीवन और शिक्षा पर ध्यान दीजिए। वह परमेश्वर का दृश्य प्रकटीकरण है (कुलुस्सियों 1:15)।
  5. परमेश्वर के नामों का अध्ययन कीजिए। यहोवा-यिरै (मेरा प्रबन्धक), यहोवा-शालोम (मेरी शान्ति), यहोवा-रोई (मेरा चरवाहा) — प्रत्येक नाम एक नया कोण देता है।

संबंधित पद

विचारणीय

परमेश्वर का स्वभाव सदा वही रहता है, चाहे आप कहीं भी हों। आज के दिन में जो भी अनिश्चित हो, याद रखिए कि एक ही नाम सब कालों में टिका है — “मैं हूं।” उसी की उपस्थिति में रहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परमेश्वर कौन है?

बाइबल के अनुसार परमेश्वर सृष्टि का रचनेवाला है — पवित्र, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञानी, और सदा रहनेवाला। निर्गमन 3:14 में वह अपना नाम बताता है: “मैं जो हूं सो हूं” — अर्थात्, स्वयं के अस्तित्व का स्रोत और सदाकाल विद्यमान।

परमेश्वर का नाम क्या है?

बाइबल में परमेश्वर के अनेक नाम हैं — यहोवा (सदा रहनेवाला), एलोहीम (सृष्टिकर्ता), अदोनै (प्रभु), एल शद्दै (सर्वशक्तिमान)। प्रत्येक नाम परमेश्वर के स्वभाव का एक पहलू प्रकट करता है।

“मैं जो हूं सो हूं” का क्या अर्थ है?

इब्रानी में यह वाक्यांश “एह्ये अशेर एह्ये” है। इसका अर्थ है — मैं स्वयं विद्यमान हूँ, मेरा अस्तित्व किसी पर निर्भर नहीं, और मैं सदा वही हूँ। यह घोषणा है कि परमेश्वर समय के अधीन नहीं, परिस्थिति के अधीन नहीं, और किसी कारण से उत्पन्न नहीं।

क्या यीशु मसीह और परमेश्वर एक हैं?

हाँ। यूहन्ना 1:1 में लिखा है, “वचन परमेश्वर था,” और यूहन्ना 8:58 में यीशु ने स्वयं कहा, “इब्राहीम के जन्म से पहले मैं हूँ।” यह वही “मैं हूँ” है जो निर्गमन 3:14 में परमेश्वर ने मूसा को बताया था।

परमेश्वर को कैसे जानें?

परमेश्वर को जानने के तीन प्रमुख मार्ग बाइबल बताती है — उसका वचन (पवित्र शास्त्र), उसका पुत्र यीशु मसीह (जो उसका सम्पूर्ण प्रकटीकरण है, इब्रानियों 1:3), और प्रार्थना। ये तीनों मिलकर उसके स्वभाव का गहरा बोध देते हैं।