मसीह समुदाय की आठ विशेषताएँ
परिचय
इंग्लैंड के पूर्वी फुटबॉल कप्तान, डेविड बेकहम, 1998 में वर्ल्ड कप फाइनल से भेज दिए जाने की घटना को याद करते हैं: "यह शायद से मेरे जीवन की लंबी यात्रा थी...पीछे की ओर देखते हुए मैं नहीं जानता कि मेरे दिमाग में कौन से विचार घूम रहे थेः यह डर, आत्मिग्लानि, क्रोध, चिंता और उलझन का एक भँवर था। मेरा सिर घूम रहा था...मैं ड्रेसिंग रूम में चला गया। नियम बताते थे कि मुझे बाकी मैच तक वहाँ पर रुकना था।" इंग्लैंड हार गया। हम वर्ल्ड कप से बाहर हो गए।
"जब इंग्लैंड के खिलाड़ी ड्रेसिंग रूम में आये, किसी ने मुझ से कोई शब्द नहीं कहा। वहाँ पर पूरी तरह से शांति थी। मैं महसूस कर सकता था कि मेरा पेट और सख्त होता जा रहा था। मैंने निगल लिया, अंदर साँस ली, और फिर से निगल लिया। मैं भीड़ भरे कमरे में था लेकिन मैंने कभी जीवन में इतना अकेला महसूस नहीं किया था। मैं बहुत अकेला और भयभीत था...मैं अपनी आत्मग्लानि और चिंता में फँस गया था।"
परमेश्वर नहीं चाहते हैं कि आप अकेले रहे, परमेश्वर ने आपको समुदाय के लिए बनाया –आपको उनके साथ और दूसरे मनुष्यों के साथ संबंध में बुलाते हुए।
मसीह समुदाय, चर्च, प्रभु यीशु का समुदाय है,"भेड़ों का अच्छा चरवाह" (इब्रानियों 13:20)। हर स्थानीय कलीसिया महान चरवाहे का एक समुदाय बनने के लिए बुलाई गई है।
नीतिवचन 27:23-28:6
23 अपने रेवड़ की हालत तू निश्चित जानता है।
अपने रेवड़ की ध्यान से देखभाल कर।
24 क्योंकि धन दौलत तो टिकाऊ नहीं होते हैं। यह राजमुकुट पीढ़ी—
पीढ़ी तक बना नहीं रहता है।
25 जब चारा कट जाता है, तो नई घास उग आती है।
वह घास पहाड़ियों पर से फिर इकट्ठी कर ली जाती है।
26 तब तब ये मेमनें ही तुझे वस्त्र देंगे और ये
बकरियाँ खेतों की खरीद का मूल्य बनेगीं।
27 तेरे परिवार को, तेरे दास दासियों को
और तेरे अपने लिये भरपूर बकरी का दूध होगा।
28दुष्ट के मन में सदा भय समाया रहता है और इसी कारण वह भागता फिरता है।
किन्तु धर्मी जन सदा निर्भय रहता है वैसे हो जैसे सिंह निर्भय रहता है।
2 देश में जब अराजकता उभर आती है बहुत से शासक बन बैठते हैं।
किन्तु जो समझता है और ज्ञानी होता है, ऐसा मनुष्य ही व्यवस्था स्थिर करता है।
3 वह राजा जो गरीब को दबाता है,
वह वर्षा की बाढ़ सा होता है जो फसल नहीं छोड़ती।
4 व्यवस्था के विधान को जो त्याग देते हैं, दुष्टों की प्रशंसा करते,
किन्तु जो व्यवस्था के विधान को पालते उनका विरोध करते।
5 दुष्ट जन न्याय को नहीं समझते हैं।
किन्तु जो यहोवा की खोज में रहते हैं, उसे पूरी तरह जानते हैं।
6 वह निर्धन उत्तम हैं जिसकी राह खरी है।
न कि वह धनी पुरुष जो टेढ़ी चाल चलता है।
समीक्षा
पास्टोरल केअर का एक समुदाय
जैसा कि सँडि मिलर अक्सर कहते हैं,"अंत में लोगों से अंतर पड़ता है। " अपनी भेड़-बकरियों की दशा भली – भाँति मन लगाकर जान ले, और अपने सब पशुओं के झुण्डों की देखभाल उचित रीति से कर " (27:23, एम.एस.जी)।
बाईबल अक्सर चरवाह और उनकी भेड़ के इस चित्र का इस्तेमाल करती है परमेश्वर के लोगों के लिए परमेश्वर की चिंता, और परमेश्वर के लोगों के अंतर्गत लीडर्स की भूमिका का वर्णन करने के लिए (उदा. भजनसंहिता 78:70-71; 1पतरस 5:2-4)। आपके भरोसे पर सौंपे गए लोगों की अच्छी देखभाल कीजिए। उनकी स्थिति को जानिये और उन पर सावधानीपूर्वक ध्यान दीजिए।
ये वचन उस समुदाय की तीन विशेषताओं को बताते हैं जो हमें बनाना हैः
1. एक निर्भीक समुदाय
अपने विश्वास में निर्भीक बनिए " दुष्ट लोग जब कोई पीछा नहीं करता तब भी भागते हैं, परन्तु सत्यनिष्ठ लोग जवान सिंहो के समान निडर रहते हैं" (28:1, एम.एस.जी)।
2. अच्छी तरह से चलाया जाने वाला समुदाय
जब गड़बडी होती है तब सबके पास इसे सुधारने की योजना होती है," परन्तु समझदार और ज्ञानी मनुष्य के द्वारा सुप्रबन्ध बहुत दिन के लिये बना रहेगा" (व.2, एम.एस.जी)।
3. एक सत्यनिष्ठ समुदाय
"जो निर्धन पुरुष कंगालों पर अन्धेर करता है ... बुरे लोग न्याय को नहीं समझ सकते, परंतु यहोवा को ढूँढ़ने वाले सब कुछ समझतें हैं" (वव.3,5, एम.एस.जी)।
प्रार्थना
इब्रानियों 13:1-25
सन्तुष्टता की आराधना
13भाई के समान परस्पर प्रेम करते रहो। 2 अतिथियों का सत्कार करना मत भूलो, क्योंकि ऐसा करतेहुए कुछ लोगों ने अनजाने में ही स्वर्गदूतों का स्वागत-सत्कार किया है। 3 बंदियों को इस रूप में याद करो जैसे तुम भी उनके साथ बंदी रहे हो। जिनके साथ बुरा व्यवहार हुआ है उनकी इस प्रकार सुधि लो जैसे मानो तुम स्वयं पीड़ित हो।
4 विवाह का सब को आदर करना चाहिए। विवाह की सेज को पवित्र रखो। क्योंकि परमेश्वर व्यभिचारियों और दुराचारियों को दण्ड देगा। 5 अपने जीवन को धन के लालच से मुक्त रखो। जो कुछ तुम्हारे पास है, उसी में संतोष करो क्योंकि परमेश्वर ने कहा है:
“मैं तुझको कभी नहीं छोड़ूँगा;
मैं तुझे कभी नहीं तजूँगा।”
6 इसलिए हम विश्वास के साथ कहते हैं:
“प्रभु मेरी सहाय करता है;
मैं कभी भयभीत न बनूँगा।
कोई मनुष्य मेरा क्या कर सकता है?”
7 अपने मार्ग दर्शकों को याद रखो जिन्होंने तुम्हें परमेश्वर का वचन सुनाया है। उनकी जीवन-विधि के परिणाम पर विचार करो तथा उनके विश्वास का अनुसरण करो। 8 यीशु मसीह कल भी वैसा ही था, आज भी वैसा ही है और युग-युगान्तर तक वैसा ही रहेगा। 9 हर प्रकार की विचित्र शिक्षाओं से भरमाये मत जाओ। तुम्हारे मनों के लिए यह अच्छा है कि वे अनुग्रह के द्वारा सुदृढ़ बने न कि खाने पीने सम्बन्धी नियमों को मानने से, जिनसे उनका कभी कोई भला नहीं हुआ, जिन्होंने उन्हें माना।
10 हमारे पास एक ऐसी वेदी है जिस पर से खाने का अधिकार उनको नहीं है जो तम्बू में सेवा करते है। 11 महायाजक परम पवित्र स्थान पर पापबलि के रूप में पशुओं का लहू तो ले जाता है, किन्तु उनके शरीर डेरों के बाहर जला दिए जाते हैं। 12 इसीलिए यीशु ने भी स्वयं अपने लहू से लोगों को पवित्र करने के लिए नगर द्वार के बाहर यातना झेली। 13 तो फिर आओ हम भी इसी अपमान को झेलते हुए जिसे उसने झेला था, डेरों के बाहर उसके पास चलें। 14 क्योंकि यहाँ हमारा कोई स्थायी नगर नहीं है बल्कि हम तो उस नगर की बाट जोह रहे हैं जो आनेवाला है। 15 अतः आओ हम यीशु के द्वारा परमेश्वर को स्तुति रूपी बलि अर्पित करें जो उन होठों का फल है जिन्होंने उसके नाम को पहचाना है। 16 तथा नेकी करना और अपनी वस्तुओं को औरों के साथ बाँटना मत भूलो। क्योंकि परमेश्वर ऐसी ही बलियों से प्रसन्न होता है।
17 अपने मार्ग दर्शकों की आज्ञा मानो। उनके अधीन रहो। वे तुम पर ऐसे चौकसी रखते हैं जैसे उन व्यक्तियों पर रखी जाती है जिनको अपना लेखा जोखा उन्हें देना है। उनकी आज्ञा मानो जिससे उनका कर्म आनन्द बन जाए। न कि एक बोझ बने। क्योंकि उससे तो तुम्हारा कोई लाभ नहीं होगा।
18 हमारे लिए विनती करते रहो। हमें निश्चय है कि हमारी चेतना शुद्ध है। और हम हर प्रकार से वही करना चाहते हैं जो उचित है। 19 मैं विशेष रूप से आग्रह करता हूँ कि तुम प्रार्थना किया करो ताकि शीघ्र ही मैं तुम्हारे पास आ सकूँ।
20 जिसने भेड़ों के उस महान रखवाले हमारे प्रभु यीशु के लहू द्वारा उस सनातन करार पर मुहर लगाकर मरे हुओं में से जिला उठाया, वह शांतिदाता परमेश्वर 21 तुम्हें सभी उत्तम साधनों से सम्पन्न करे। जिससे तुम उसकी इच्छा पूरी कर सको। और यीशु मसीह के द्वारा वह हमारे भीतर उस सब कुछ को सक्रिय करे जो उसे भाता है। युग-युगान्तर तक उसकी महिमा होती रहे। आमीन!
22 हे भाईयों, मेरा आग्रह है कि तुम प्रेरणा देने वाले मेरे इस वचन को धारण करो मैंने तुम्हें यह पत्र बहुत संक्षेप में लिखा है। 23 मैं चाहता हूँ कि तुम्हें ज्ञात हो कि हमारा भाई तीमुथियुस रिहा कर दिया गया है। यदि वह शीघ्र ही आ पहुँचा तो मैं उसी के साथ तुमसे मिलने आऊँगा।
24 अपने सभी अग्रणियों और संत जनों को नमस्कार कहना। इटली से आये लोग तुम्हें नमस्कार भेजते हैं।
25 परमेश्वर का अनुग्रह तुम सबके साथ रहे।
समीक्षा
यीशु का एक समुदाय
बिल हेबिल्स लिखते हैं,"स्थानीय कलीसिया विश्व की आशा है"। "स्थानीय कलीसिया जैसा कुछ नहीं है जब यह सही रीति से काम करता है।" यीशु का समुदाय, भेड़ो का महान रखवाला (व.20), पृथ्वी पर सबसे अद्भुत समुदाय है। यह "प्रेम" के द्वारा बना हुआ है (व.1, एम.एस.जी)। यह प्रेम केवल भावनाओं के विषय में नहीं है। यह आपके कार्य करने के तरीके को प्रभावित करता है। यदि आप जानना चाहते हैं कि "भाई और बहन" (व.1) के रूप में एक दूसरे से प्रेम करना कैसा दिखता है, तो इब्रानियों के लेखक पाँच परिभाषित करने वाले गुणों पर जोर देते हैं जोकि मसीह समुदाय की विशेषताएँ होनी चाहिएः
1. अतिथी सत्कार करिए
"अतिथी-सत्कार करना न भूलना, क्योंकि इसके द्वारा कुछ लोगों ने अनजाने में स्वर्गदूतों का आदर-सत्कार किया है" (व.2, एम.एस.जी) – जैसा कि अब्राहम और सारा ने उत्पत्ति 18 में किया।
भोजन को मिल बांटकर खाना अतिथी – सत्कार और मिशन का केंद्र है। जब आप साथ भोजन करते हैं अपनी निगरानी को नीचे रख देते हैं, अजनबियों का स्वागत करते हैं और मित्र बन जाते हैं।
2. जरुरतमंदो की सहायताक करिए
"कैदियों की ऐसी सुधि लो कि मानो उनके साथ तुम भी कैद हो, और जिनके साथ बुरा बर्ताव किया जाता है, उनकी भी यह समझकर सुधि लिया करो कि हमारी भी देह है" (इब्रानियों 13:3, एम.एस.जी)। जब आप बंदीगृह में, या निंदा के शिकार के लिए सेवकाई करते हैं, तब आप यीशु से मिलते हैं (मत्ती 25:40)।
3. विवाह का सम्मान कीजिए
"विवाह सब में आदर की बात समझी जाए, और विवाह- बिछौना निष्कलंक रहे, क्योंकि परमेश्वर व्यभिचारियों, और परस्त्रीगामियों का न्याय करेंगे " (इब्रानियों 13:4, एम.एस.जी)।
3. संतुष्ट रहिए
"तुम्हारा स्वभाव लोभरहित हो, और जो तुम्हारे पास है उसी पर सन्तोष करिए; क्योंकि उन्होंने आप ही कहा है, "मैं तुझे कभी न छोडूँगा, और न कभी तुझे त्यागूँगा" (व.5, एम.एस.जी)। आपको पैसे पर अपना दिमाग लगाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि परमेश्वर ने वायदा किया है कि जैसे ही आप उन पर अपना दिमाग लगाते हैं, वह आपके लिए उन चीजों का ध्यान रखेंगे। वह वायदा करते हैं कि कभी आपको छोड़ेंगे नहीं और त्यागेंगे नहीं।
4. परमेश्वर को प्रसन्न करिए
"इसलिये हम उनके द्वारा स्तुतिरूपी बलिदान, अर्थात उन होठों का फल जो उनके नाम का अंगीकार करते हैं, परमेश्वर को सर्वदा चढ़ाया करें। भलाई करना और उदारता दिखाना न भूलो, क्योंकि परमेश्वर ऐसे बलिदानों से प्रसन्न होता है" (वव.15-16)। यें तीन चीजें परमेश्वर को प्रसन्न करती हैं: प्रार्थना करना (विशेष रूप से स्तुति करना), सेवा करना (भलाई करना) और देना (दूसरों के साथ बाँटना)।
लेखक मसीह समुदाय में लीडरशिप के महत्व पर भी जोर देते हैं। हम सभी प्रभु यीशु के अधीन हैं," जो भेड़ों के महान रखवाले हैं" (व.20)। किंतु, वहाँ पर मानवीय लीडर्स भी हैं। पाँच चीजे हैं जो वह लीडर्स के बारे में कहते हैं:
1. उनकी सराहना कीजिए
"जो तुम्हारे अगुवे थे, और जिन्होंने तुम्हें परमेश्वर का वचन सुनाया है, उन्हें स्मरण रखिए" (व.7अ, एम.एस.जी)।
2. उनका अनुकरण करिए
"ध्यान से उनके चाल - चलन का अन्त देखकर उनके विश्वास का अनुकरण करिए" (व.7ब)। यह उस व्यक्ति के लिए बड़ी चुनौती है जो मसीह लीडरशिप में जुड़ा हुआ है। दूसरे देख रहे हैं और उन्हें अनुकरण करने के लिए कहा गया है। एक अच्छा उदाहरण, अच्छी सलाह से अधिक अच्छा होता है।
3. उनके प्रति उत्तर दीजिए
"अपने अगुवों की आज्ञा मानो और उनके अधीन रहो, क्योंकि वे उनके समान तुम्हारे प्राणों के लिये जागते रहते हैं जिन्हें लेखा देना पड़ेगा; वे यह काम आनन्द से करें, न कि ठंडी साँस ले लेकर, क्योंकि इस दशा में तुम्हें कुछ लाभ नहीं" (व.17, एम.एस.जी)।
4. उनके लिए प्रार्थना करिए
लेखक स्वयं उनके एक लीडर थे और वह चिताते हैं," हमारे लिये प्रार्थना करते रहो, क्योंकि हमें भरोसा है कि हमारा विवेक शुध्द है: और हम सब बातों में अच्छी चाल चलना चाहते हैं" (व.18, एम.एस.जी)।
5. उनका स्वागत करिए
"अपने सब अगुवों और सब पवित्र लोगों को नमस्कार कहो" (व.24)। कदाचित इन वचनो के साथ उन्हें नमस्कार कहना चाहिए," तुम सब पर अनुग्रह होता रहे" (व.25)। "अनुग्रह" वह शब्द है जिसमें पत्र और उस प्रकार का समुदाय शामिल है जो हमें बनना है। अनुग्रह के समुदाय में सभी लोग प्रेम, अर्थ और आशा पाते हैं।
प्रार्थना
यहेजकेल 30:1-31:18
बाबुल की सेना मिस्र पर आक्रमण करेगी
30यहोवा का वचन मुझे फिर मिला। उसने कहा, 2 “मनुष्य के पुत्र, मेरे लिये कुछ कहो। कहो, मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है:
“‘रोओ और कहो,
“वह भयंकर दिन आ रहा है।”
3 वह दिन समीप है!
हाँ, न्याय करने का यहोवा का दिन समीप है।
यह एक दुर्दिन होगा।
यह राष्ट्रों के साथ न्याय करने का समय होगा!
4 मिस्र के विरुद्ध तलवार आएगी! कूश के लोग भय से काँप उठेंगे,
जिस समय मिस्र का पतन होगा।
बाबुल की सेना मिस्र के लोगों को बन्दी बना कर ले जाएगी।
मिस्र की नींव उखड़ जाएगी!
5 “‘अनेक लोगों ने मिस्र से शान्ति—सन्धि की। किन्तु कूश, पूत, लूद, समस्त अरब, कूब और इस्राएल के सभी लोग नष्ट होंगे!
6 “‘मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: हाँ, जो मिस्र की सहायता करते हैं उनका पतन होगा!
उसकी शक्ति का गर्व नीचा होगा।
मिस्र के लोग युद्ध में मारे जाएंगे मिग्दोल से लेकर सवेन तक के।
मेरे स्वामी यहोवा ने वे बातें कहीं!
7 मिस्र उन देशों में मिल जाएगा जो नष्ट कर दिए गए।
मिस्र उन खाली देशों में से एक होगा।
8 मैं मिस्र में आग लगाऊँगा
और उसके सभी सहायक नष्ट हो जायेंगे।
तब वे जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ!
9 “‘उस समय मैं दूतों को भेजूँगा। वे जहाजों में कूश को बुरी खबरें पहुँचाने के लिये जाएंगे। कूश अब अपने को सुरक्षित समझता है। किन्तु कूश के लोग भय से तब काँप उठेंगे जब मिस्र दण्डित होगा। वह समय आ रहा है!’”
10 मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है:
“मैं बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर का उपयोग करूँगा और
मैं मिस्र के लोगों को नष्ट करूँगा।
11 नबूकदनेस्सर और उसके लोग
राष्ट्रों में सर्वाधिक भयंकर हैं।
मैं उन्हें मिस्र को नष्ट करने के लिये लाऊँगा।
वे मिस्र के विरुद्ध अपनी तलवारें निकालेंगे।
वे प्रदेश को शवों से पाट देंगे।
12 मैं नील नदी को सूखी भूमि बना दूँगा।
तब मैं सूखी भूमि को बुरे लोगों को बेच दूँगा।
मैं अजनबियों का उपयोग उस देश को खाली करने के लिये करूँगा।
मैं यहोवा ने, यह कहा है!”
मिस्र की देवमूर्तियाँ नष्ट की जाएंगी
13 मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है:
“मैं मिस्र में देवमूर्तियों को नष्ट करुँगा।
मैं मूर्तियों को नोप से बाहर करूँगा।
मिस्र देश में कोई भी प्रमुख भविष्य के लिये नहीं होगा,
और मैं मिस्र में भय भर दूँगा।
14 मैं पत्रोस को खाली करा दूँगा।
मैं सोअन में आग लगा दूँगा।
मैं नो को दण्ड दूँगा
15 और मैं सीन नामक मिस्र के किले के विरुद्ध अपने क्रोध की वर्षा करूँगा!
मैं नो के लोगों को नष्ट करूँगा।
16 मैं मिस्र में आग लगाऊँगा।
सीन नामक स्थान भय से पीड़ित होगा,
नो नगर में सैनिक टूट पड़ेंगे
और नो को प्रतिदिन नयी परेशानियाँ होंगी।
17 आवेन और पीवेसेत के युवक युद्ध में मारे जाएंगे
और स्त्रियाँ पकड़ी जाएंगी और ले जाई जाएँगी।
18 तहपन्हेस का यह काला दिन होगा, जब मैं मिस्र के अधिकार को समाप्त करूँगा
मिस्र की गर्वीली शक्ति समाप्त होगी!
मिस्र को दुर्दिन ढक लेगा
और उसकी पुत्रियाँ पकड़ी और ले जायी जाएँगी।
19 इस प्रकार मैं मिस्र को दण्ड दूँगा।
तब वे जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ!”
मिस्र सदा के लिये दुर्बल होगा
20 देश निकाले के ग्यारहवें वर्ष में प्रथम महीने (अप्रैल) के सातवें दिन यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, 21 “मनुष्य के पुत्र, मैंने मिस्र के राजा फिरौन की भुजा (शक्ति) तोड़ डाली है। कोई भी उसकी भुजा पर पट्टी नहीं लपेटेगा। उसका घाव नहीं भरेगा। अत: उसकी भुजा तलवार पकड़ने योग्य शक्ति वाली नहीं होगी।”
22 मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “मैं मिस्र के राजा फिरौन के विरुद्ध हूँ। मैं उसकी दोनों भुजाओं शक्तिशाली भुजा और पहले से टूटी भुजा को तोड़ डालूँगा। मैं उसके हाथ से तलवार को गिरा दूँगा। 23 मैं मिस्रियों को राष्ट्रों में बिखेर दूँगा। 24 मैं बाबुल के राजा की भुजाओं को शक्तिशाली बनाऊँगा। मैं अपनी तलवार उसके हाथ में दूँगा। किन्तु मैं फिरौन की भुजा को तोड़ दूँगा। तब फिरौन पीड़ा से चीखेगा, राजा की चीख एक मरते हुए व्यक्ति की चीख सी होगी। 25 अत: मैं बाबुल के राजा की भुजाओं को शक्तिशाली बनाऊँगा, किन्तु फिरौन की भुजायें कट गिरेंगी। तब वे जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ।
“मैं बाबुल के राजा के हाथों अपनी तलवार दूँगा। तब वह मिस्र देश के विरुद्ध अपनी तलवार को आगे बढ़ायेगा। 26 मैं मिस्रियों को राष्ट्रों में बिखेर दूँगा। तब वे समझेंगे कि मैं यहोवा हूँ!”
अश्शूर एक देवदार वृक्ष की तरह है
31देश निकाले के ग्यारहवें वर्ष में तीसरे महीने (जून) के प्रथम दिन यहोवा का सन्देश मुझे मिला। उसने कहा, 2 “मनुष्य के पुत्र, मिस्र के राजा फिरौन और उसके लोगों से यह कहो:
“‘तुम्हारी महानता में
कौन तुम्हारे समान है
3 अश्शूर, लबानोन में, सुन्दर शाखाओं सहित एक देवदार का वृक्ष था।
वन की छाया—युक्त और अति ऊँचा एक देवदार का वृक्ष था।
इसके शिखर जलद भेदी थे!
4 जल वृक्ष को उगाता था।
गहरी नदियाँ वृक्ष को ऊँचा करती थीं।
नदियाँ उन स्थान के चारों ओर बहती थीं, जहाँ वृक्ष लगे थे।
केवल इसकी धारायें ही खेत के अन्य वृक्षों तक बहती थीं।
5 इसलिये खेत के सभी वृक्षों से ऊँचा वृक्ष वही था
और इसने कई शाखायें फैला रखी थीं।
वहाँ काफी जल था।
अत: वृक्ष—शाखायें बाहर फैली थीं।
6 वृक्ष की शाखाओं में संसार के सभी पक्षियों ने घोंसले बनाए थे।
वृक्ष की शाखाओं के नीचे,
खेत के सभी जानवर बच्चों को जन्म देते थे।
सभी बड़े राष्ट्र
उस वृक्ष की छाया में रहते थे।
7 अत: वृक्ष अपनी महानता
और अपनी लम्बी शाखाओं में सुन्दर था।
क्यों? क्योंकि इसकी जड़ें यथेष्ट
जल तक पहुँची थीं!
8 परमेश्वर के उद्यान के देवदारु वृक्ष भी,
उतने बड़े नहीं थे जितना यह वृक्ष।
सनौवर के वृक्ष इतनी अधिक शाखायें नहीं रखते,
चिनार—वृक्ष भी ऐसी शाखायें नहीं रखते,
परमेश्वर के उद्यान का कोई भी वृक्ष,
इतना सुन्दर नहीं था जितना यह वृक्ष।
9 मैंने अनेक शाखाओं सहित
इस वृक्ष को सुन्दर बनाया
और परमेश्वर के उद्यान अदन, के सभी वृक्ष
इससे ईर्ष्या करते थे!’”
10 अत: मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: “वृक्ष ऊँचा हो गया है। इसने अपने शिखरों को बादलों में पहुँचा दिया है। वृक्ष गर्वीला है क्योंकि यह ऊँचा है! 11 इसलिये मैंने एक शक्तिशाली राजा को इस वृक्ष को लेने दिया। उस शासक ने वृक्ष को उसके बुरे कामों के लिये दण्ड दिया। मैंने उस वृक्ष को अपने उद्यान से बाहर किया है। 12 अजनबी अत्याधिक भयंकर राष्ट्रों ने इसे काट डाला और छोड़ दिया। वृक्ष की शाखायें पर्वतों पर और सारी घाटी में गिरीं। उस प्रदेश में बहने वाली नदियों में वे टूटे अंग बह गए। वृक्ष के नीचे कोई छाया नहीं रह गई, अत: सभी लोगों ने उसे छोड़ दिया। 13 अब उस गिरे वृक्ष में पक्षी रहते हैं और इसकी गिरी शाखाओं पर जंगली जानवर चलते हैं।
14 “अब कोई भी, उस जल का वृक्ष गर्वीला नहीं होगा। वे बादलों तक पहुँचना नहीं चाहेंगे। कोई भी शक्तिशाली वृक्ष, जो उस जल को पीता है, ऊँचा होने की अपनी प्रशंसा नहीं करेगा। क्यों क्योंकि उन सभी की मृत्यु निश्चित हो चुकी है। वे सभी मृत्यु के स्थान शेओल नामक पाताल लोक में चले जाएंगे। वे उन अन्य लोगों के साथ हो जाएंगे जो मरे और नीचे नरक में चले गए।”
15 मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “उस दिन जब तक वृक्ष शेओल को गया मैंने लोगों से शोक मनवाया। मैंने गहरे जल को, उसके लिये शोक से ढक दिया। मैंने वृक्ष की नदियों को रोक दिया और वृक्ष के लिये जल का बहना रूक गया। मैंने लबानोन से इसके लिये शोक मनवाया। खेत के सभी वृक्ष इस बड़े वृक्ष के शोक से रोगी हो गए। 16 मैंने वृक्ष को गिराया और वृक्ष के गिरने की ध्वनि के भय से राष्ट्र काँप उठे। मैंने वृक्ष को मृत्यु के स्थान पर पहुँचाया। यह नीचे उन लोगों के साथ रहने गया जो उस नरक में नीचे गिरे हुए थे। अतीत में एदेन के सभी वृक्ष अर्थात् लबानोन के सर्वोत्तम वृक्ष उस पानी को पीते थे। उन सभी वृक्षों ने पाताल लोक में शान्ति प्राप्त की। 17 हाँ, वे वृक्ष भी बड़े वृक्ष के साथ मृत्यु के स्थान पर गए। उन्होंने उन व्यक्तियों का साथ पकड़ा जो युद्ध में मर गए थे। उस बड़े वृक्ष ने अन्य वृक्षों को शक्तिशाली बनाया। वे वृक्ष, राष्ट्रों में उस बड़े वृक्ष की छाया में रहते थे।
18 “अत: मिस्र, एदेन में बहुत से विशाल और शक्तिशाली वृक्ष है। उनमें से किस वृक्ष के साथ मैं तुम्हारी तुलना करूँगा! तुम एदेन के वृक्षों के साथ पाताल लोक को जाओगे! मृत्यु के स्थान में तुम उन विदेशियों और युद्ध में मारे गए व्यक्तियों के साथ में लेटोगे।
“हाँ, यह फिरौन और उसके सभी लोगों के साथ होगा!” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा था।
समीक्षा
एक समुदाय जो चरवाह को जानता है
परमेश्वर की उनके समुदाय के लिए इच्छा है कि हम ऐसा एक स्थान बने जहाँ पर खोए हुए, टूटे हुए और अकेले व्यक्ति आशा, चंगाई और प्रेम को पायें।
बाद में पुस्तक में, यहेजकेल उस चरवाह के विषय में बताते हैं जो देश पर शासन करेगा (यहेजकेल 34)। यीशु के विषय में एक भविष्यवाणी में वह कहते हैं," मैं उन पर ऐसा एक चरवाहा ठहराउँगा जो उनकी चरवाही करेगा...वही उनको चराएगा, और वही उनका चरवाहा होगा" (व.23)।
किंतु, आज के लेखांश में, यहेजकेल ऐसे समुदाय के बारे में बताते हैं जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं। वह न्याय के दिन के बारे में बताते हैं जब " वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूँ" (30:8,19,26)। यह लेखांश चेतावनी देता है कि किस प्रकार के व्यवहार से दूर रहना है। वे अपनी संपत्ति पर भरोसा करते थे (व.4) और "अपनी शक्ति पर" (व.6)। वे अक्खड़ थे (व.10, एम.एस.जी)। वे आत्मसंतुष्टि (व.9) और उन्होंने परमेश्वर की जगह मूर्तों के पीछे जाना शुरु कर दिया (व.13)।
अध्याय 31 में लबानोन के देवदार की तुलना उस समुदाय के साथ की गई है, जिसका वर्णन यीशु करते हैं।" उसकी टहनियाँ बहुत हुईं, और उसकी शाखाएँ लम्बी हो गई, क्योंकि जब वे निकलीं, तब उनको बहुत जल मिला। उसकी टहनियों में आकाश के सब प्रकार के पक्षी बसेरा करते थे" (वव.5-6)। उसकी छाया में सब बड़ी जातियाँ रहती थीं। वह अपनी बड़ाई और अपनी डालियों की लम्बाई के कारण सुन्दर हुआ; क्योंकि उसकी जड़ बहुत जल के निकट थी" (व.7)। किंतु, इसे काट दिया गया और यह समाप्त हो गया (व.10 से)।
परमेश्वर का राज्य बहुत विपरीत है। " वह राई के दाने के समान है, जब भूमि में बोया जाता है तो भूमि के सब बीजों से छोटा होता है, परन्तु जब बोया जाता है, तो उगकर सब सागपात से बड़ा हो जाता है, और उसकी ऐसी बड़ी डालियाँ निकलती हैं कि आकाश के पक्षी उसकी छाया में बसेरा कर सकते हैं" (मरकुस 4:31-32)।
आइये हम ऐसा एक समुदाय बनते हैं जो राई के दाने के समान बढ़ता है और ऐसा एक स्थान बन जाता है जहाँ पर खोए हुए, टूटे हुए और अकेले व्यक्ति इसकी छाया में बसेरा पाये – एक समुदाय जो परमेश्वर को जानता है, जहाँ पर लोगों का महत्व है, और जहाँ हम हमारे प्रभु यीशु मसीह के लीडरशिप का आनंद लेते हैं, जो भेड़ो के महान रखवाले हैं.
प्रार्थना
पिप्पा भी कहते है
इब्रानियों 13:5
"...जो आपके पास है उससे संतुष्ट रहो..."
"और अधिक भौतिक वस्तुओं को पाने की धुन में मत रहो। जो आपके पास है उसमें संतोष करो" (एम.एस.जी)।
मैं अक्सर अपनी अलमारी में देखती हूँ और मुझे वह नहीं मिलता जो मैं ढूंढ रही थी, या मैं बाजार में होती हूँ और सोचती हूँ कि किसी दूसरे की ट्रॉली में जो भोजनवस्तुएं भरी हुई हैं मेरी चीजों से अधिक अच्छी लग रही है। लेकिन बाईबल कहती है,"जो आपके पास है उससे संतुष्ट रहो।"
दिन का वचन
इब्रानियों - 13:6
"इसलिये हम बेधड़क होकर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है॥"

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संदर्भ
डेविड बेखम, डेविड बेखम माय साइड, (विलो, 2004)।
जहाँ पर कुछ बताया न गया हो, उन वचनों को पवित्र बाइबल, न्यू इंटरनैशनल संस्करण एन्ग्लिसाइड से लिया गया है, कॉपीराइट © 1979, 1984, 2011 बिबलिका, पहले इंटरनैशनल बाइबल सोसाइटी, हूडर और स्टोगन पब्लिशर की अनुमति से प्रयोग किया गया, एक हॅचेट यूके कंपनी सभी अधिकार सुरक्षित। ‘एनआईवी", बिबलिका यू के का पंजीकृत ट्रेडमार्क संख्या 1448790 है।
जिन वचनों को (एएमपी, AMP) से चिन्हित किया गया है उन्हें एम्प्लीफाइड® बाइबल से लिया गया है. कॉपीराइट © 1954, 1958, 1962, 1964, 1965, 1987 लॉकमैन फाउंडेशन द्वारा प्राप्त अनुमति से उपयोग किया गया है। (www.Lockman.org)
जिन वचनों को (एमएसजी MSG) से चिन्हित किया गया है उन्हें मैसेज से लिया गया है। कॉपीराइट © 1993, 1994, 1995, 1996, 2000, 2001, 2002. जिनका प्रयोग एनएवीप्रेस पब्लिशिंग ग्रुप की अनुमति से किया गया है।