परमेश्वर ने मुझे छुड़ाया है
परिचय
टोनी बुलीमोर, उम्र छप्पन वर्ष, ब्रिटेन के सबसे ज़्यादा अनुभव प्राप्त अटलांटिक पार एक क्रीड़ा नौका नाविक थे। उन्हें मौत का डर सताने लगा जब दो महीने तक चलने वाली वेन्डे ग्लोब राउंड-द-वर्ल्ड रेस में उनकी साठ फुट लंबी नौका, एक्साइड चैलेंजर, दक्षिणी सागर की बर्फीली विशालता में पलट गई थी।
उलटी हुई नाव पचपन फुट ऊँची लहर की चपेट में आ गई थी। नाव चली गई। अपनी किताब, सेव्ड, में टोनी बुलीमोर वर्णन करते हैं कि यह नियाग्रा फाल्स के जैसे नीचे बहने वाला झरना था। वह बावन फुट गहरी अंधेरी, शोरवाली, गीली और ठंडी उल्टी दुनिया में चार दिनों तक फंसे हुए थे और उनके आसपास का तापमान जमा देने वाला भयंकर ठंडा था।
वह जहाज़ पर होने वाली मितली और नौका के तल और पाने के स्तर के बीच बची रह गई कुछ ही फुट हवा के कारण डर और बेचैनी महसूस कर रहे थे। वह निकटतम द्वीप से हज़ारों मील दूर थे। जब हवा की आपूर्ति कम हो गई तो उन्होंने प्रार्थना की कि वह बच जाएं।
रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी और एयर फोर्स उनके बचाव के लिए आईं। आधुनिक उपग्रह और निगरानी से ऑस्ट्रेलियन सरकार सभी नौकाओं की स्थिति पर बारीकी से नज़र रखे हुई थी और उन्होंने एक बचाव दल भेजा था।
चार दिनों के बाद टोनी अपनी नौका पर एक खटखटाना सुना। उन्होंने बाद में कहा कि, 'ऑस्ट्रेलिया की नौसेना, कप्तान और सभी कर्मचारियों ने मेरे लिए जो भी किया उसका मैं कभी भी पर्याप्त धन्यवाद नहीं दे पाऊँगा, क्योंकि उन्होंने सच में मेरा जीवन बचाया है, इसमे कोई संदेह नहीं है।' जब वह बाहर आए तो उन्होंने सबसे पहले ये शब्द कहे, 'धन्यवाद परमेश्वर, यह एक चमत्कार है।' उन्होंने कहा, 'मुझे लगा, जैसे मुझे फिर से नया जीवन मिल गया। मुझे लगा जैसे मैं एक नया व्यक्ति हूँ। मुझे लगा मैं फिर से जीवित कर दिया गया हूँ।'
उस समय एक पत्रकार ने लिखा था, 'एक बचाव जो सभी विपरीत परिस्थितियों के विरूद्ध सफल हुआ और हर एक अपेक्षाएं सभी सर्वोत्तम कहानियां हैं। यह असली और स्वत: प्रवर्तित आनंद है।' हमें अपने पापों से बचाने के लिए यीशु ने सर्वोच्च रीति से खुद का प्राण बलिदान किया।' (गलातियों 1:4अ)।
जब मैं अपने जीवन में पीछे देखता हूँ, तो ऐसे कई अवसर थे जब परमेश्वर ने मुझे बचाया है। जब आप मुश्किल परिस्थितियों का सामना करें, तो आप परमेश्वर पर भरोसा कर सकते हैं कि वह आपको बचा लेंगे।
भजन संहिता 31:1-8
संगीत निर्देशक को दाऊद का एक पद।
31हे यहोवा, मैं तेरे भरोसे हूँ,
मुझे निराश मत कर।
मुझ पर कृपालु हो और मेरी रक्षा कर।
2 हे यहोवा, मेरी सुन,
और तू शीघ्र आकर मुझको बचा ले।
मेरी चट्टान बन जा, मेरा सुरक्षा बन।
मेरा गढ़ बन जा, मेरी रक्षा कर!
3 हे परमेश्वर, तू मेरी चट्टान है,
सो अपने निज नाम हेतु मुझको राह दिखा और मेरी अगुवाई कर।
4 मेरे लिए मेरे शत्रुओं ने जाल फैलाया है।
उनके फँदे से तू मुझको बचा ले, क्योंकि तू मेरा सुरक्षास्थल है।
5 हे परमेश्वर यहोवा, मैं तो तुझ पर भरोसा कर सकता हूँ।
मैं मेरा जीवन तेरे हाथ में सौपता हूँ।
मेरी रक्षा कर!
6 जो मिथ्या देवों को पूजते रहते हैं, उन लोगों से मुझे घृणा है।
मैं तो बस यहोवा में विश्वास रखता हूँ।
7 हे यहोवा, तेरी करुणा मुझको अति आनन्दित करती है।
तूने मेरे दु:खों को देख लिया
और तू मेरे पीड़ाओं के विषय में जानता है।
8 तू मेरे शत्रुओं को मुझ पर भारी पड़ने नहीं देगा।
तू मुझे उनके फँदों से छुडाएगा।
समीक्षा
परमेश्वर पर भरोसा करें कि वह आपको बचा लेंगे
कभी - कभी परमेश्वर पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है, खासकर की जब आपके जीवन में चीज़ें गलत होती नजर आएं – आपके संबंधों में, काम में, धन में, स्वास्थ्य में या किसी अन्य स्थिति में। यहाँ दाऊद की प्रार्थना हमारे लिए एक प्रोत्साहन है कि हम बचाव के लिए परमेश्वर को पुकारें और फिर उन पर भरोसा करें।
जैसा कि टोनी बुलीमोर ने बचाव के लिए प्रार्थना की थी, उसी तरह से दाऊद ने भी प्रार्थना की थी, 'अपना कान मेरी ओर लगाकर तुरन्त मुझे छुड़ा ले!' (पद - 2अ)। 'मेरा भरोसा यहोवा ही पर है' (पद - 6ब)।
दाऊद ने कहा, ' मैं अपनी आत्मा को तेरे ही हाथ में सौंप देता हूँ' (पद - 5)। मरने से तुरंत पहले, यीशु ने भी इन शब्दों को दोहराया था। उन्होंने ज़ोर से पुकारा, 'पिता, मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूँ' (लूका 23:46)। ये विश्वास के अंतिम शब्द हैं।
इस भजन में हम आपके लिए परमेश्वर के प्रेम का परिणाम देखते हैं, जिसे यीशु की मृत्यु के द्वारा सर्वोच्च रीति से दिखाया गया है।
- प्रभु आपका शरणस्थान हैं
यह भजन संहिता इन शब्दों से शुरू होता है, ' हे परमेश्वर मेरा भरोसा तुझ पर है' (भजन संहिता 31:1अ)। बाद में वे कहते हैं, 'जो जाल उन्होंने मेरे लिये बिछाया है उससे तू मुझ को छुड़ा ले, क्योंकि तू ही मेरा दृढ़ गढ़ है' (पद - 4)। इस जीवन में अनेक परीक्षाएँ, दु:ख, जाल और प्रलोभन हैं। प्रभु, इन सब में आप मेरे शरण स्थान हैं।
- प्रभु आपकी चट्टान हैं
दाऊद लिखते हैं, 'प्रभु, मेरी चट्टान हैं' (पद - 2ब) और 'क्योंकि तू मेरे लिये चट्टान और मेरा गढ़ है; इसलिये अपने नाम के निमित्त मेरी अगुवाई कर, और मुझे आगे ले चल' (पद - 3)। आप उनकी आत्मा के द्वारा, परमेश्वर के मार्गदर्शन और उनकी अगुआई को जान सकते हैं। वह आपकी सुरक्षा हैं जिन पर आप निर्भर हो सकते हैं।
- प्रभु आपको छुड़ाते हैं
वह प्रार्थना करते हैं, 'अपना कान मेरी ओर लगाकर तुरन्त मुझे छुड़ा ले!' (पद - 2अ)। आगे वह बताते हैं कि किस तरह से परमेश्वर ने 'कष्ट के समय में मेरी सुधि ली है,' (पद - 7ब)। 'फिर भी परमेश्वर ने उन्हें शत्रु के हाथ नहीं पड़ने दिया' (पद - 8अ)। 'तू ने मेरे पांवों को चौड़े स्थान में खड़ा किया है' (पद - 8ब)। यीशु में आपको परम मुक्ति मिलती है। वह आपके पैरों को चौड़े स्थान में खड़ा करते हैं।
प्रार्थना
मरकुस 13:32-14:16
32 “उस दिन या उस घड़ी के बारे में किसी को कुछ पता नहीं, न स्वर्ग में दूतों को और न अभी मनुष्य के पुत्र को, केवल परम पिता परमेश्वर जानता है। 33 सावधान! जागते रहो! क्योंकि तुम नहीं जानते कि वह समय कब आ जायेगा।
34 “वह ऐसे ही है जैसे कोई व्यक्ति किसी यात्रा पर जाते हुए सेवकों के ऊपर अपना घर छोड़ जाये और हर एक को उसका अपना अपना काम दे जाये। तथा चौकीदार को यह आज्ञा दे कि वह जागता रहे। 35 इसलिए तुम भी जागते रहो क्योंकि घर का स्वामी न जाने कब आ जाये। साँझ गये, आधी रात, मुर्गे की बाँग देने के समय या फिर दिन निकले। 36 यदि वह अचानक आ जाये तो ऐसा करो जिससे वह तुम्हें सोते न पाये। 37 जो मैं तुमसे कहता हूँ, वही सबसे कहता हूँ ‘जागते रहो!’”
यीशु की हत्या का षड़यन्त्र
14फ़सह पर्व और बिना खमीर की रोटी का उत्सव आने से दो दिन पहले की बात है कि प्रमुख याजक और यहूदी धर्मशास्त्री कोई ऐसा रास्ता ढूँढ रहे थे जिससे चालाकी के साथ उसे बंदी बनाया जाये और मार डाला जाये। 2 वे कह रहे थे, “किन्तु यह हमें पर्व के दिनों में नहीं करना चाहिये, नहीं तो हो सकता है, लोग कोई फसाद खड़ा करें।”
यीशु पर इत्र उँडेलना
3 जब यीशु बैतनिय्याह में शमौन कोढ़ी के घर भोजन करने बैठा था, तभी एक स्त्री सफेद चिकने स्फटिक के एक पात्र में शुद्ध बाल छड़ का इत्र लिये आयी। उसने उस पात्र को तोड़ा और इत्र को यीशु के सिर पर उँडेल दिया।
4 इससे वहाँ कुछ लोग बिगड़ कर आपस में कहने लगे, “इत्र की ऐसी बर्बादी क्यों की गयी है? 5 यह इत्र तीन सौ दीनारी से भी अधिक में बेचा जा सकता था। और फिर उस धन को कंगालों में बाँटा जा सकता था।” उन्होंने उसकी कड़ी आलोचना की।
6 तब यीशु ने कहा, “उसे क्यों तंग करते हो? छोड़ो उसे। उसने तो मेरे लिये एक मनोहर काम किया है। 7 क्योंकि कंगाल तो सदा तुम्हारे पास रहेंगे सो तुम जब चाहो उनकी सहायता कर सकते हो, पर मैं तुम्हारे साथ सदा नहीं रहूँगा। 8 इस स्त्री ने वही किया जो वह कर सकती थी। उसने समय से पहले ही गाड़े जाने के लिये मेरे शरीर पर सुगन्ध छिड़क कर उसे तैयार किया है। 9 मैं तुमसे सत्य कहता हूँ: सारे संसार में जहाँ कहीं भी सुसमाचार का प्रचार-प्रसार किया जायेगा, वहीं इसकी याद में जो कुछ इस ने किया है, उसकी चर्चा होगी।”
यहूदा यीशु से शत्रुता ठानता है
10 तब यहूदा इस्करियोती जो उसके बारह शिष्यों में से एक था, प्रधान याजक के पास यीशु को धोखे से पकड़वाने के लिए गया। 11 वे उस की बात सुनकर बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने उसे धन देने का वचन दिया। इसलिए फिर यहूदा यीशु को धोखे से पकड़वाने की ताक में रहने लगा।
फ़सह का भोज
12 बिना खमीर की रोटी के उत्सव से एक दिन पहले, जब फ़सह (मेमने) की बलि दी जाया करती थी उसके शिष्यों ने उससे पूछा, “तू क्या चाहता है कि हम कहाँ जा कर तेरे खाने के लिये फ़सह भोज की तैयारी करें?”
13 तब उसने अपने दो शिष्यों को यह कह कर भेजा, “नगर में जाओ, जहाँ तुम्हें एक व्यक्ति जल का घड़ा लिये मिले, उसके पीछे हो लेना। 14 फिर जहाँ कहीं भी वह भीतर जाये, उस घर के स्वामी से कहना, ‘गुरु ने पूछा है भोजन का मेरा वह कमरा कहाँ है जहाँ मैं अपने शिष्यों के साथ फ़सह का खाना खा सकूँ।’ 15 फिर वह तुम्हें ऊपर का एक बड़ा सजा-सजाया तैयार कमरा दिखायेगा, वहीं हमारे लिये तैयारी करो।”
16 तब उसके शिष्य वहाँ से नगर को चल दिये जहाँ उन्होंने हर बात वैसी ही पायी जैसी उनसे यीशु ने कही थी। तब उन्होंने फ़सह का खाना तैयार किया है।
समीक्षा
अपने छुड़ाने वाले को दिल से प्यार करें
गरीबों को प्यार करने से ज़्यादा महत्त्वपूर्ण यीशु से प्यार करना है। अवश्य ही यह यीशु के लिये प्यार है जो दूसरों से प्यार करने के लिए हमारे हृदय से बहता है, खासकर गरीबों से।
इस तरह का प्यार यीशु के शरीर से बहने वाले अभिषेक जैसा है। इस स्त्री ने यीशु के प्रति अपना प्रेम और कृतज्ञता दिखलाई। इस दृष्टि से, कीमती इत्र एक अपव्यय था (शायद एक साल की आमदनी) जो कि व्यर्थ नहीं थी (14:4)। निश्चय ही, यीशु गरीबों की ज़रूरतों से अंजान नहीं थे। फिर भी, उन्होंने कहा कि उसने जो धन खर्च किया है वह व्यर्थ नहीं है: ' उस ने मेरे गाड़े जाने की तैयारी में पहले से मेरी देह पर इत्र मला है' (पद - 8)।
इस कार्य को हमेशा याद रखा जाएगा (पद - 9)। यीशु की नज़र में, प्यार में उनके लिए किया गया कोई भी कार्य व्यर्थ नहीं है (पद - 7-8) या उनके द्वारा भुलाया नहीं जाएगा (पद - 9)। बजाय इसके, उनके लिए प्यार में किये गए हर एक कार्य को वह 'एक सुंदर चीज़' के रूप में देखते हैं (पद - 6)।
उनके गाड़े जाने के संबंध में यीशु द्वारा कही गई इस वास्तविकता की ओर ध्यान आकर्षित करती है कि उनके जीवन का अंत निकट था। जैसा कि वे करते हैं, इससे यह स्पष्ट होता है कि यीशु ने फसह के पर्व को अपने जीवन की अंतिम घटना के रूप में चुना था।
इसी लेखांश में, फसह के पर्व का उल्लेख पाँच बार किया गया है (पद - 1,12,14,16)। फसह मेमने के रूप में यीशु अपनी मृत्यु को स्पष्ट रूप से जान गए थे जिसका बलिदान किया जाना था (पद - 12)। मेमने के लहू ने परमेश्वर के लोगों को न्याय और मृत्यु से छुड़ाया था। 'क्योंकि हमारा भी फसह जो मसीह है, बलिदान हुआ है' (1 कुरिंथिंयों 5:7ब)।
यहाँ हम और भी प्रमाण देखते हैं कि यीशु ने खुद को परमेश्वर का असाधारण पुत्र माना था। जब वह अपने दुबारा आने के बारे में कहते हैं, तो वह कहते हैं कि, 'उस दिन या उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता, न स्वर्ग के दूत और न पुत्र, परन्तु केवल पिता' (मरकुस 13:32)।
टोनी बुलीमोरे ने उन लोगों के प्रति कितना आभार महसूस किया होगा जब उन लोगों ने उसे बचाया था! उसने कहा कि मैं उन लोगों को कभी भी पर्याप्त धन्यवाद नहीं दे पाऊँगा। तो हमें उनका कितना ज़्यादा आभार व्यक्त करना चाहिये और उनसे कितना ज़्यादा प्यार करना चाहिये, क्योंकि उन्होंने हमें अनंत मृत्यु से छुड़ाने के लिए अपने प्राण का बलिदान दिया है।
प्रार्थना
लैव्यव्यवस्था 15:1-16:34
शरीर से बहने वाले स्रावों के नियम
15यहोवा ने मूसा और हारून से कहा, 2 “इस्राएल के लोगों से कहोः जब किसी व्यक्ति के शरीर से धात का स्राव होता है तब वह व्यक्ति अशुद्ध होता है। 3 वह धात शरीर से खुला बहता है या शरीर उसे बहने से रोक देता है इसका कोई महत्व नहीं।
4 “यदि धात त्याग करने वाला बिस्तर पर सोया रहत है तो वह बिस्तर अशुद्ध हो जाता है। जिस चीज़ पर भी वह बैठता है वह अशुद्ध हो जाता है। 5 यदि कोई व्यक्ति उसके बिस्तर को छूता भी है तो उसे अपने वस्त्रों को धोना और पानी से नहाना चाहिए। वह सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा। 6 यदि कोई व्यक्ति उस चीज़ पर बैठता है जिस पर धात त्याग करने वाला व्यक्ति बैठा हो तो उसे अपने वस्त्र धोना और बहते पानी में नहाना चाहिये वह सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा। 7 यदि कोई व्यक्ति उस व्यक्ति को छूता है जिसने धात त्याग किया है तो उसे अपने वस्त्रों को धोना चाहिए तथा बहते पानी में नहाना चाहिए। वह सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा। 8 यदि धात त्याग करने वाला व्यक्ति किसी शुद्ध व्यक्ति पर थूकता है तो शुद्ध व्यक्ति को अपने वस्त्र धोने चाहिए तथा नहाना चाहिए। यह व्यक्ति सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा। 9 पशु पर बैठने की कोई काठी जिस पर धात त्याग करने वाला व्यक्ति बैठा हो तो वह अशुद्ध हो जाएगी। 10 इसलिए कोई व्यक्ति जो धात त्याग करने वाले व्यक्ति के नीचे रहने वाली किसी चीज़ को छूता है, सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा। जो व्यक्ति धात त्याग करने वाले व्यक्ति के नीचे की चीज़ें ले जाता है उसे अपने पस्त्रों को धोना चाहिए तथा बहते पानी में नहाना चाहिए। वह सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा। 11 यह सम्भव है कि धात त्याग करने वाल व्यक्ति पानी में हाथ धोए बिना किसी अनय् व्यक्ति को छूए। तब दूसरा व्यक्ति अपने वस्त्रों को धोए और बहते पानी में नहाए। वह सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा।
12 “धात त्याग करने वाला व्यक्ति यदि मिट्टी का कटोरा छूए तो वह कटोरा फोड़ देना चाहिए। यदि धात त्याग करने वाला व्यक्ति कोई लकड़ी का कटोरा छूए तो उस कटोरे को बहते पानी में अच्छी तरह धोना चाहिए।
13 “जब धात त्याग करने वाला कोई व्यक्ति अपने धात त्याग से शुद्ध किया जाता है तो उसे अपनी शुद्धि के लिए उस दिन से सात दिन गिनने चाहिए। तब उसे अपने वस्त्र दोने चाहिए और बहते पानी में नहाना चाहिए। वह शुद्ध हो जाएगा। 14 आठवें दिन उस व्यक्ति को दो फ़ाख्ते या दो कबूतर के बच्चे लेने चाहिए। उसे मिलापवाले तम्बू के द्वार पर यहोवा के सामने आना चाहिए। वह व्यक्ति दो पक्षी याजक को देगा। 15 याजक पक्षियों की बलि चढ़ाएगा। एक को पापबलि के लिए तथा दूसरे को होमबलि के लिये। इस प्रकार याजक इस व्यक्ति को यहोवा के सामने उस के धात त्याग से हुई अशुद्धता से शुद्ध करेगा।
16 “यदि व्यक्ति का वीर्य निकल जाता है तो उसे सम्पूर्ण शरीर से बहते पानी में नहाना चाहिए। वह सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा। 17 यदि वीर्य किसी वस्त्र या चमड़े पर गिरे तो वह वस्त्र या चमड़ा पानी में धोना चाहिए। यह सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा। 18 यदि कोई व्यक्ति किसी स्त्री के साथ सोता है और वीर्य निकलता है तो स्त्री पुरुष दोनों को बहते पानी में नहाना चाहिए। वे सन्ध्या तक अशुद्ध रहेंगे।
19 “यदि कोई स्त्री मासिक रक्त स्राव के समय मासिक धर्म से है तो वह सात दिन तक अशुद्ध रहेगी। यदि कोई व्यक्ति उसे छूता है तो वह व्यक्ति सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा। 20 अपने मासिकधर्म के समय स्त्री जिस किसी चीज़ पर लेटेगी, वह भी अशुद्ध होगी और उस समय में जिस चीज़ पर वह बैठेगी, वह भी अशुद्ध होगी। 21 यदि कोई व्यक्ति उस स्त्री के बिस्तर को छूता है तो उसे अपने वस्त्रों को बहते पानी में धोना और नहाना चाहिए। वह सन्धया तक अशुद्ध रहागा। 22 यदि कोई व्यक्ति उस चीज़ को छूता है जिस पर वह स्त्री बैठी हो तो उस व्यक्ति को अपने वस्त्र बहते पानी में धोने चाहिए और नहाना चाहिए। वह सन्ध्या तक अशुद्ध रहाग। 23 वह व्यक्ति स्त्रिी के बिस्तर को छूता है या उस चीज़ को छूता है जिस पर वह बैठी हो, तो वह व्यक्ति सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा।
24 “यदि कोई व्यक्ति किसी स्त्री के साथ मासिक धर्म के समय यौन सम्बन्ध करता है तो वह व्यक्ति सात दिन तक अशुद्ध रहेगा। हर एक बिस्तर जिस पर वह सोता है, अशुद्ध होगा।
25 “यदि किसी स्त्री को कई दिन तक रक्त स्राव रहता है जो उसके मासिकधर्म के समय नहीं होता, या निश्चित समय के बाद मासिकधर्म होता है तो वह उसी प्रकार अशुद्ध होगी जिस प्रकार मासिकधर्म के समय और तब तक अशुद्ध रहेगी जब तक रहेगा।
26 पूरे रक्त स्राव के समय वह स्त्री जिस बिस्तर पर लेटेगी, वह वैसा ही होगा जैसा मासिकधर्म के समय। जिस किसी चीज़ पर वह स्त्री बैठेगी, वह वैसे ही अशुद्ध होगी जैसे वह मासिकधर्म से अशुद्ध होती है। 27 यदि कोई व्यक्ति उन चीज़ों को छूता है तो वह अशुद्ध होगा। इस व्यक्ति को बहते पानी से अपने कपड़े धोने चाहिए तथा नाहाना चाहिए। वह सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा। 28 उसके बाद जब स्त्री अपने मासिकधर्म से अशुद्ध हो जाती है तब से उसे सात दिन गिनने चाहिए। इसके बाद वह शुद्ध होगी। 29 फिर आठवें दिन उसे दो फ़ाख्ते और दो कबूतर के बच्चे लेने चाहिए। उसे उन्हें मिलापवाले तम्बू के द्वार पर याजक के पास लाना चाहिए। 30 तब याजक को एक पक्षी पापबलि के रूप में तथा दूसरे को होमबलि के रूप में चढ़ाना चाहिए। इस प्रकार वह याजक उसे यहोवा के सामने उसके स्राव से उत्पन्न अशुद्धि से शुद्ध करेगा।
31 “इसलिए तुम इस्राएल के लोगों को अशुद्ध होने और उनको अशुद्धि से दूर रहने के बारे में सावधान करना । यदि तुम लोगों को सावधान नहीं करते तो वे मेरे पवित्र तम्बू को अशुद्ध कर सकते हैं और तब उन्हें मरना होगा!”
32 ये नियम धात त्याग करने वाले लोगों के लिए हैं। ये नियम उन व्यक्तियों के लिए हैं जो वीर्य के शरीर से बाहर निकलने से अशुद्ध होते हैं 33 और ये नियम उन स्त्रियों के लिए हैं जो अपने मासिकधर्म के रक्त स्राव के समय अशुद्ध होती है और वे नियम उन पुरुषों के लिए हैं जो अशुद्ध स्त्रियों के साथ सोने से अशुद्ध होते हैं।
पाप से निस्तार का दिन
16हारून के दो पुत्र यहोवा को सुगन्ध भेंट चढ़ाते समय मर गए थे। फिर यहोवा ने मूसा से कहा, 2 “अपने भाई हारून से बात करो कि वह जब चाहे तब पर्दे के पीछे महापवित्र स्थान में नहीं जा सकता है। उस पर्दे के पीछे जो कमरा है उसमें पवित्र सन्दूक रखा है। उस पवित्र सन्दूक के ऊपर उसका विशेष ढक्कन लगा है। उस विशेष ढक्कन के ऊपर एक बादल में मैं प्रकट होता हूँ। यदि हारून उस कमरे में जाता है तो वह मर जायेगा!
3 “पाप से निस्तार के दिन पवित्र स्थान में जाने के पहले हारून को पापबलि के रूप में एक बछड़ा और होमबलि के लिए एक मेढ़ा भेंट करना चाहिए। 4 हारून अपने पूरे शरीर को पानी डालकर धोएगा। तब हारून इन वस्त्रों को पहनेगा: हारून पवित्र सन के वस्त्र पहनेगा। सन के निचले वस्त्र शरीर से सटे होगें। उसकी पेटी सन का पटुका होगी। हारून सन की पगड़ी बाँधेगा। ये पवित्र वस्त्र हैं।
5 “हारून को इस्राएल के लोगों से दो बकरे पापबलि के रूप में और एक मेढ़ा होमबलि के लिए लेना चाहिए। 6 तब हारून बैल की पापबलि चढ़ाएगा। यह पापबलि उसके अपने लिए और उसेक परिवार के लिए है। तब हारून वह उपासना करेगा जिसमें वह और उसका परिवार शुद्ध होंगे।
7 “इसके बाद हारून दो बकरे लेगा और मिलापवाले तमबू के द्वार पर यहोवा के सामने लाएगा। 8 हारून दोनों बकरों के लिए चिट्ठी डालेगा। एक चिट्ठी यहोवा के लिए होगी। दूसरी चिट्ठी अजाजेल के लिए होगी।
9 “तब हारून चिट्ठी डालकर यहोवा के लिए चुने गए बकरे की भेंट चढ़ाएगा। हारून को इस बकरे को पापबलि के लिये चढ़ाना चाहिए। 10 किन्तु चिट्ठी डालकर अजाजेल के लिए चुना गया बकरा यहोवा के सामने जीवित लाया जाना चाहिए। याजक उसे शुद्ध बनाने के लिये उपासना करेगा। तब यह बकरा मरुभूमि में अजाजेल के पास भेजा जाएगा।
11 “तब हारून अपने लिये बैल को पापबलि के रूप में चढ़ाएगा। हारून अपने आप को और अपने परिवार को शुद्ध करेगा। हारुन बैल को अपने लिए पापबलि के रूप में मारेगा। 12 तब उसे आग के लिए एक तसला वेदी के अंगारों से भरा हुआ यहोवा के सामने लाना चाहिए। हारून दो मुट्ठी वह मधुर सुगन्धि धूप लेगा जो बारीक पीसी गिई है। हारून को पर्दे के पीछे कमरे में उस सुगन्धित को लाना चाहिये। हारून को यहोवा के सामने सुगन्ध को आग में डालना चाहिए। 13 तब सुगन्धित धूप के धुएका बादल साक्षीपत्र के ऊपर के विशेष ढक्कन को ढक लेगा। इस प्रकार हारून नहीं मरेगा। 14 साथ ही साथ हारून को बैल का कुछ खून लेना चाहिए और उसे अपनी उँगली से उस विशेष ढक्कन के पूर्व की ओर छिड़कना चाहिए। इस के सामने वह अपनी ऊँगली से सात बार खून छिड़केगा।
15 “तब हारून को लोगों के लिए पापबलि स्वरूप बकरे को मारना चाहिए। हारून को बकरे का खून पर्दे के पीछे कमरे में लाना चाहिए। हारून को बकरे के खून से वैसा ही करना चाहिए जैसा बैल के खून से उसने किया। हारून को उस ढक्कन पर और ढक्कन के साने बकरे का खून छिड़कना चाहिए। 16 ऐसा अनेक बार हुआ जब इस्राएल के लोग अशुद्ध हुए। इसलिए हारून इस्राएल के लोगों के अपराध और पाप से महापवित्र स्थान को शुद्ध करने के लिए उपासना करेगा। हारून को ये काम क्यों करना चाहिए क्योंकि मिलापवाला तम्बू अशुद्ध लोगों के बीच में स्थित है।
17 “जिस समय हारून महापवित्र स्थान को शुद्ध करे, उस समय कोई व्यक्ति मिलापवाले तम्बू में नहीं होना चाहिए। किसी व्यक्ति को उसके भीतर तब तक नहीं जाना चाहिए जब तक हारून बाहर न आ जाय। इस प्रकार हारून अपने को और अपने परिवार को शुद्ध करेगा और तब इस्राएल के सभी लोगों को शुद्ध करेगा। 18 तब हारून उस वेदी पर जाएगा जो यहोवा के सामने है हारून वेदी को शुद्ध करेगा। हारून बैल का कुछ खून और कुछ बकरे का खून लेकर वेदी के कोनों पर चारों ओर लगाएगा। 19 तब हारून कुछ खून अपनी ऊँगली से वेदी पर सात बार छिकेगा। इस प्रकार हारून इस्राएल के लोगों के सभी पापों से वेदी को शुद्ध और पवित्र करेगा।
20 “हारून महापवित्र स्थान, मिलापवाले तम्बू तथा वेदी को पवित्र बनाएगा। इन कामों के बाद हारून यहोवा के पास बकरे को जीवित लाएगा। 21 हारून अपने दोनों हाथों को जीवित बकरे के सिर पर रखेगा। तब हारून बकरे के ऊपर इस्राएल के लोगों के अपराध और पाप को कबूल करेगा। इस प्रकार हारून लोगों के पापों को बकरे के सिर पर डालेगा। तब वह बकरे को दूर मरुभूमि में भेजेगा. एक व्यक्ति बगल में बकरे को ले जाने के लिए खड़ा रहेगा। 22 इस प्रकार बकरा सभी लोगों के पाप अपने ऊपर सूनी मरुभूमि में ले जाएगा। जो व्यक्ति बकरे को ले जाएगा वह मरुभूमि में उसे खुला छोड़ देगा।
23 “तब हारून मिलापवाले तम्बू में जाएगा। वह सन के उन वस्त्रों को उतारेगा जिन्हें उसने महपवित्र स्थान में जाते समय पहना था। उसे उन वस्त्रों को वहीं छोड़ना चाहिए। 24 वहअपने पूरे शरीर को पवित्र स्थान में पानी डालकर धोएगा। तब वह अपने अन्य विशेष वस्त्रों को पहनेगा। वह बाहर आएगा और अपने लिये होमबलि और लोगों के लिये होमबलि चढ़ाएगा। वह अपने को तथा लोगों को पापों से मुक्त करेगा। 25 तब वह वेदी पर पापबलि की चर्बी को जलाएगा।
26 “जो व्यक्ति बकरे को अजाजेल के पास ले जाए, उसे अपने वस्त्र तथा अपने पूरे शरीर को पानी डालकर धोना चाहिए। उसके बाद वह व्यक्ति डेरे में आ सकता है।
27 “पापबलि के बैल और बकरे को डेरे के बाहर ले जाना चाहिए। (उन जानवरों का खून पवित्र स्थान में पवित्र चीज़ों को शुद्ध करने के लिए लाया गया था।) याजक उन जानवरों का चमड़ा, शरीर और शरीर मल आग में जलाएगा। 28 तब उन चीज़ों को जलाने वाले व्यक्ति को अपने वस्त्र और पूरे शरीर को पानी डालकर धोना चाहिए। उसके बाद वह व्यक्ति डेरे में आ सकात है।
29 “यह नियम तुम्हारे लिए सदैव रहेगा: सातवें महीने के दसवें दिन तुम्हें उपवास करना चाहिए। तुम्हें कोई काम नहीं करना चाहिए। तुम्हारे साथ रहने वाले यात्री या विदेशी भी कोई काम नहीं कर सगेंगे। 30 क्यों क्योंकि इस दिन याजक तुमहें शुद्ध करता है और तुम्हारे पापों को धोता है। तब तुम यहोवा के लिए शुद्ध होगे। 31 यह दिन तुम्हारे लिए आराम करने का विशेष दिन है। तुम्हें इस दिन उपवास करना चाहिए। यह नियम सदैव के लिए होगा।
32 “सो वह पुरुष जो महायाजक बनने के लिए अभिषिक्त है, वस्तुओं को शुद्ध करने की उपासना को सम्पन्न करेगा। यह वही पुरुष है जिसे उसके पिता की मृत्यु के बाद महायाजक के रूप में सेवा के लिए नियुक्त किया गया है। उस याजक को सन के पवित्र वस्त्र धारण करने चाहिए। 33 उसे पवित्र स्थान, मिलापवाले तम्बू और वेदी को शुद्ध करना चाहिए और उसे याजक और इस्राएल के सभी लोगों को शुद्ध करना चाहिए। 34 इस्राएल के लोगों को शुद्ध करने का यह नियम सदैव रहेगा। इस्राएल के लोगों के पाप के निस्तार के लिए तुम उन क्रियाओं को वर्ष में एक बार करोगे।”
इसलिए उन्होंने वही किया जो यहोवा ने मूसा को आदेश दिया था।
समीक्षा
परमेश्वर की अद्भुत बचाव योजना पर विस्मित होना
आपके लिए उनके महान प्रेम के कारण, परमेश्वर ने आपको बचाने के लिए ध्यानपूर्वक एक योजना बनाई थी। टोनी बुलीमोर की बचाव योजना बनाने में और इसकी तैयारी करने में कई दिन लगे थे। निश्चय ही मानव जाति के लिए परमेश्वर की महान बचाव योजना बनाने और इसकी तैयारी करने और इसे साकार करने में इससे ज़्यादा समय लगा होगा।
'अशुद्धता' के बारे में नियम हमारे आधुनिक कानों को अजीब लगते हैं। वह इसलिए क्योंकि इन्हें हम पर लागू नहीं किया गया था। इन्हें यीशु के द्वारा पूरा किया गया है।
प्रायश्चित का दिन (अध्याय 16) यीशु की मृत्यु की पृष्ठभूमि तैयार करता है। संत पौलुस लिखते हैं, 'उसे परमेश्वर ने उसके लोहू के कारण एक ऐसा प्रायश्चित्त ठहराया, ' (रोमियों 3:25)। इब्रानियों के लेखक लिखते हैं कि यीशु, 'इस कारण उस को चाहिए था, कि सब बातों में अपने भाइयों के समान बने; जिस से वह उन बातों में जो परमेश्वर से सम्बन्ध रखती हैं, एक दयालु और विश्वास योग्य महायाजक बने ताकि लोगों के पापों के लिये प्रायश्चित्त करे।' (इब्रानियों 2:17)।
सच्चाई यह है कि बलिदान करने के द्वारा महायाजक को प्रवेश करने के अधिकार प्राप्त होना उनकी याजकाई की अपर्याप्तता का प्रमाण है (इब्रानियों 5:3; 7:27; 9:7; 9:11-15)।
प्रायश्चित करने के दिन बलिदान करने में हम क्रूस का विस्मयकारी पूर्वाभास देखते हैं: 'वह अपने दोनों हाथों को जीवित बकरे पर रखकर इस्रालियों के सब अधर्म के कामों, और उनके सब अपराधों, निदान उनके सारे पापों को अंगीकार करे, और उन को बकरे के सिर पर धरकर उसको किसी मनुष्य के हाथ जो इस काम के लिये तैयार हो जंगल में भेज के छुड़वा दे। और वह बकरा उनके सब अधर्म के कामों को अपने ऊपर लादे हुए किसी निराले देश में उठा ले जाएगा;' (लैव्यव्यवस्था 16:21-22अ)। यह अंग्रेजी शब्द 'बलि का बकरा' का मूल है (बकरे का बलि चढ़ाना, पद - 8)।
यह आपके पापों और मेरे पापों को यीशु पर डाले जाने का आदिरूप है। (यशायाह 53:4-6 देखें)। प्रेरित पतरस यीशु के बारे में लिखते हैं, ' वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिए हुए क्रूस पर चढ़ गया' (1पतरस 2:24अ)। उन्होंने हमारे पापों को इतनी दूर कर दिया जैसे पूर्व और पश्चिम दिशा होती हैं (भजन संहिता 103:12)। जब यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने यीशु को देखा, तो उसने कहा, 'यह परमेश्वर का मेमना है, जो जगत के पाप उठा ले जाता है!' (यूहन्ना 1:29)।
इसके परिणाम स्वरूप परमेश्वर के साथ आपके संबंध में अद्भुत बदलाव आया है। यीशु के द्वारा, अब आप हर दिन अति पवित्र स्थान में प्रवेश कर सकते हैं (इब्रानियों 10:19-20)। आप हियाव बांधकर अनुग्रह के सिंहासन के निकट पहुँच सकते हैं (4:16) और यह जान सकते हैं कि आपका हमेशा स्वागत है।
प्रार्थना
पिप्पा भी कहते है
भजन संहिता 31:1-8
मुझे यह छवि अच्छी लगती है जिसमें परमेश्वर हमारा मज़बूत गढ़ हैं (पद - 2)। ब्रिटेन के मध्यकालीन युग में, जब चढ़ाई करने वाले गांवों पर आक्रमण करते थे, तो गांव वाले सुरक्षा के लिए एक किले में भाग जाते थे और उन सबके अंदर आ जाने के बाद, वे सीढ़ी को खींच लेते थे। इससे शत्रु के आने का मार्ग कट जाता था और सभी लोग अंदर सुरक्षित हो जाते थे। मुश्किल समय में हम परमेश्वर की शरण में जा सकते हैं जो कि हमारा मज़बूत गढ़ हैं।
दिन का वचन
भजन संहिता – 31:5
"मैं अपनी आत्मा को तेरे ही हाथ में सौंप देता हूं; हे यहोवा, हे सत्यवादी ईश्वर, तू ने मुझे मोल लेकर मुक्त किया है॥"

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संदर्भ
नोट्स:
जहाँ पर कुछ बताया न गया हो, उन वचनों को पवित्र बाइबल, न्यू इंटरनैशनल संस्करण एन्ग्लिसाइड से लिया गया है, कॉपीराइट © 1979, 1984, 2011 बिबलिका, पहले इंटरनैशनल बाइबल सोसाइटी, हूडर और स्टोगन पब्लिशर की अनुमति से प्रयोग किया गया, एक हॅचेट यूके कंपनी सभी अधिकार सुरक्षित। ‘एनआईवी’, बिबलिका यू के का पंजीकृत ट्रेडमार्क संख्या 1448790 है।
जिन वचनों को (एएमपी, AMP) से चिन्हित किया गया है उन्हें एम्प्लीफाइड® बाइबल से लिया गया है। कॉपीराइट © 1954, 1958, 1962, 1964, 1965, 1987 लॉकमैन फाउंडेशन द्वारा प्राप्त अनुमति से उपयोग किया गया है। (www.Lockman.org)
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